आसमान से गिर रही बूंदें खिलाड़ियों के रनों की बरसात में बाधा बन रही है। बारिश के मौसम में मैदानों पर खिलाड़ियों का पसीना बहाना बंद है। आउटडोर खेल में सबसे महत्वपूर्ण क्रिकेट का घरेलू सीजन 24 जुलाई से देवधर ट्रॉफी के साथ शुरू हो रहा है।
आसमान से गिर रही बूंदें खिलाड़ियों के रनों की बरसात में बाधा बन रही है। बारिश के मौसम में मैदानों पर खिलाड़ियों का पसीना बहाना बंद है। आउटडोर खेल में सबसे महत्वपूर्ण क्रिकेट का घरेलू सीजन 24 जुलाई से देवधर ट्रॉफी के साथ शुरू हो रहा
छह जोन में बंटकर होने वाली प्रतियोगिता में बिहार के खिलाड़ी भी शामिल होंगे। मुश्किल से तीन से चार दिन के कैंप के बाद क्रिकेटर सीधे मैच खेलेंगे। करीब डेढ़ महीने चौके-छक्के न लगने की मुख्य वजह इंडोर में अभ्यास की सुविधा का न होना है।
कई सहूलियत देने वाला राजगीर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम भी) सात सालों से बन ही रहा है, तो मोइनुल हक के दिन बहुरने का इंतजार जारी है।
जिनपर प्रदेश का जिम्मा, वो इंतजार नहीं करते
बिहार रणजी टीम के मुख्य कोच पवन कुमार कहते हैं कि मैदान के बिना खिलाड़ी की कल्पना नहीं की जा सकती। बारिश के मौसम में अभ्यास न होने की दिक्कत काफी पुरानी है।
करीब दो महीने के अंतराल के दौरान मजबूर खिलाड़ी खुद से अभ्यास की व्यवस्था में लग जाते हैं, तो कुछ दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। वे कहते हैं कि जिनके कंधों पर प्रदेश का जिम्मा है, वो किसी के भरोसे नहीं रहते।
कम से कम मैदान का अभाव तो नहीं होना चाहिए
पवन कहते हैं कि क्रिकेट का सेंटर कहीं जाने वाली राजधानी में कम से कम मैदान का अभाव नहीं होना चाहिए। सरकार प्रयास कर रही है, उम्मीद है जल्द सभी सुविधाएं अपने ही राज्य में मिलने लगेंगी।
नेट पर घंटों पसीना बहाकर ही दिखेगा परिणाम
बिहार रणजी टीम के कप्तान आशुतोष अमन कहते हैं कि बारिश के दिनों में इंडोर स्टेडियम की जरूरत है। खिलाड़ियों को अपने कौशल को निखारने के लिए नेट पर अभ्यास की दरकार रहती है। घंटों पसीना बहाने के बाद ही वह मैदान पर बेहतर कर सकेगा।
सरकार की इसमें कोई बड़ी भूमिका नहीं है। बिहार क्रिकेट संघ इस दिशा में काम कर रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की टीम ने राज्य का दौरा कर सुविधा देने की बात कही है। अगले सत्र से बदलाव की उम्मीद है।
खिलाड़ी खुद कर लेता है अभ्यास का प्रबंध
बिहार रणजी टीम के सदस्य बाबुल कुमार कहते हैं कि पेशेवर क्रिकेटर खुद से कोशिशें जारी रखते हैं। सीनियर खिलाड़ियों की नजर बनी रहती है कि कहां बेहतर अभ्यास हो सकता है। राज्य में यह परेशानी कई सालों से बनी हुई है, इसलिए अब चौके-छक्के की उम्मीद लगाए खिलाड़ी पहले ही प्रबंध कर लेता है।
अंतिम समय में टीम का चुना जाना भी इसी कड़ी की एक बड़ी समस्या है। हमारे पास आधारभूत संरचना की कमी है, पर बीसीए का इस दिशा में प्रयत्न भी जारी है।







