घातक महामारी कोविड-19 से मरने वाले लोगों के आश्रितों को मुआवजा देने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाई है। राजस्थान सरकार की तरफ से कोरोना संक्रमण से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा देने से संबंधित उठाए गए कदमों को लेकर जो शपथ पत्र दायर किया था उसपर अदालत ने असंतुष्टि जताई है। अदालत ने कहा कि यह कोई परोपकार करना नहीं था। जस्टिस एम आर शाह और कृष्ण मुरारी की बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वो इस मामले में विस्तृत शपथ पथ दायर करें।
अदालत ने कहा पहले भी आपने आश्वासन दिया था। राजस्थान की सरकार कोई परोपकार नहीं कर रही है। इस कोर्ट के द्वारा निर्देश दिया जा चुका है कि कोविड-19 से संक्रमित लोगों के साथ सहानुभूति वाला रवैया अपनाना है। राजस्थान सरकार की तरफ से जो शपथ पत्र दाखिल की गई है वो संतोषजनक नहीं है। वकीलों ने इसके बाद विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का समय मांगा। जिसपर अदालत ने कहा कि शुक्रवार तक दाखिल करें।
अदालत में राजस्थान सरकार की तरफ से मौजूद वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट वकील गौरव कुमार बंसल की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में आरोप लगाया है कि राज्स्थान सरकार कोरोना महामारी की वजह से मरने वाले लोगों के परिजनों को 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश का पालन नहीं कर रही है।
अदालत ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की है कि जरूरतमंदों के परिजनों को 50,000 रुपये देने के फर्जी दावे किये जा रहे हैं। बता दें कि पिछले साल 4 अक्टूबर को कहा गया था कि कोई भी राज्य कोरोना से संक्रमित होने के बाद मरने वाले लोगों के परिजनों को 50,000 रुपये देने से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं कर सकता क्योंकि उसे मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत की वजह में इस वायरस का जिक्र नहीं है।







