ग्रेटर नोएडा। जिला न्यायालय ने दहेज के लिए पत्नी व दो बेटियों को मौत के घाट उतारने वाले व्यक्ति अमित को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 68 हजार का अर्थदंड लगाया गया है।
साक्ष्य के अभाव में अमित के माता, पिता, भाई को निजी मुचलके पर बरी कर दिया गया है। केस की सुनवाई एडिशनल डिस्ट्रीक्ट एंड सेशन जज द्वितीय/स्पेशल जज (एससी-एसटी) एक्ट न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने की।
अधिवक्ता ललित नागर सादुल्लापुर ने बताया कि नोएडा के भंगेल के रहने वाले जगवीर ने अपनी बेटी सरला उर्फ शालू की शादी भंगेल के ही रहने वाले अमित से आठ फरवरी 2011 को की थी। सरला की एक बेटी दो साल की व दूसरी छह महीने की थी।
सरला ने अपने स्वजन को फोनकर बताया था कि उसके ससुराल पक्ष के लोग दहेज में कार मांग कर रहे हैं। दहेज की मांग पूरी नहीं होने व दूसरी बेटी होने के बाद ससुराल पक्ष के लोग उसे प्रताड़ित करने लगे। प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि ससुराल पक्ष के लोगों ने 26 मई 2014 को सरला व उसकी दो बेटियों तनु और मनु की गला दबाकर हत्या कर दी।
तिहरे हत्याकांड की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया था। मामले में पीड़ित जगवीर की तहरीर पर ससुराल पक्ष के पति अमित व अन्य सुखवीरी, देवेंद्र, ललित और राधेश्याम के खिलाफ फेज दो कोतवाली में केस दर्ज किया गया।
पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। केस की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। कुल 27 गवाह कोर्ट में पेश हुए। गवाह एवं साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने पति अमित को पत्नी व दोनों बेटियों की मौत का जिम्मेदार मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर अर्थदंड भी लगाया गया है। ससुराल पक्ष के अन्य लोग सास सुखवीरी, ससुर राधेश्याम व जेठ देवेंद्र व ललित को साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया गया है।







