सड़क हादसे में जान गंवाने वाली बुजुर्ग सविता पहली बार अपनी बेटी के साथ दिल्ली घूमने के लिए आई थीं। दिल्ली घूमने को लेकर वह काफी खुश थीं, लेकिन ऊपर वाले को कुछ ओर ही मंजूर था। बेटी के घर पहुंचने से पहले ही उनकी हादसे में मौत हो गई।
वहीं बुजुर्ग की बेटी, दामाद और नाती जीटीबी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। स्वजन उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। सादतपुर में रहने वाले निपुण चौधरी ने बताया कि गत वर्ष जुलाई में बिहार के मुजफ्फरपुर में रहने वाली उनकी दादी गुलाबो रानी की मृत्यु हो गई थी। 30 जून को उनके पिता नंद किशोर चौधरी, मां रीना और छोटा भाई सिद्धांत बिहार दादी की बरसी में गए थे। उनकी नानी सविता भी मुजफ्फरपुर में ही रहती थीं।
कैब चालक की गलती ने उजाड़ दिया परिवार
वह कभी दिल्ली नहीं आई थीं। रीना के कहने पर वह इस बार दिल्ली घूमने के लिए तैयार हो गई थीं। बृहस्पतिवार को चारों लोग बिहार से आनंद विहार बस अड्डे पहुंचे। निपुण ने बताया कि वह इस बात से काफी उत्साहित थे कि नानी उनके घर रहने के लिए आ रही हैं, लेकिन कैब चालक की एक गलती ने उनका परिवार उजाड़ दिया।
मौसी के घर छुट्टियां मनाकर लौट रही थी
नौ वर्षीय साधना करावल नगर थाने के पास रहती है। परिवार में पिता चंदन गिरी व अन्य हैं। वह सरकारी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती है। वह गर्मियों की छुट्टियों में बरेली में अपनी मौसी के घर चली गई थी। स्कूल खुल गए हैं। वह बृहस्पतिवार दोपहर को मौसी की बेटी नेहा व बेटे नितेष के साथ ट्रेन से बरेली से आनंद विहार रेलवे स्टेशन उतरी।
तीनों रेलवे स्टेशन के बाहर से खजूरी के लिए सवारी वाली ईको वैन बैठ गए थे। घायल नेहा ने कहा कि वह भाई व बहन के साथ पिछली सीट पर थी। इसलिए बच गई। हादसा बहुत खौफनाक था, वह हादसे को कभी नहीं भूल सकती। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा बहुत भीषण था।
यदि डिवाइडर न होता तो कई लोगों की मौत हो सकती थी। सबसे बुरा हाल चालक की बराबर वाली सीट पर बैठे दो लोगों का हुआ। पुलिस के पहुंचने से पहले ही राहगीरों ने घायलों को कार के अंदर से बाहर निकाल लिया था। कई लोगों के खून निकल रहा था। घायलों के शरीर से बह रहे खून को रोकने के लिए राहगीरों ने चुन्नी व रूमाल तक बांध दिए थे।







