यूपी की रामपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी न उतारने के फैसले पर पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने एक सह प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने नामांकन से रोका दिया, लेकिन सपा के विरोध के लिए वह स्वतंत्र हैं। कार्यकर्ता मायूस न होकर 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटें। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मेरी मां नूर महल का यदि नेहरू-गांधी परिवार से रिश्ता टूटा ताे इसके जिम्मेदार कांग्रेस में सक्रिय सपा के एजेंंट होंगे।
नवेद मियां ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने यूपी में जो सह प्रभारी लगा रखे हैं वे यहां पार्टी की कब्र खोद रहे हैं। एक सह प्रभारी पांच दिन से रामपुर में रहकर कांग्रेस विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे।
पूर्व मंत्री नवेद मियां ने सोमवार को जारी अपने बयान में कहा कि उन्होंने एक जून को नामांकन पत्र लिया था और नामांकन शुल्क का चालान 4 जून को ही जमा कर दिया था। नामांकन पत्र की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली थीं और नामांकन से दो घंटे पहले ही कांग्रेस द्वारा रामपुर और आजमगढ़ में प्रत्याशी न उतारे जाने के फैसले और पार्टी महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी के आग्रह पर उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया। लोग चाहते थे कि चुनाव लडूं, लेकिन पार्टी के इस निर्णय से लोगों को मायूसी हुई है।
नवेद मियां ने कहा है कि कांग्रेस का उप चुनाव न लड़ने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस हाईकमान ने यूपी में जो सह प्रभारी लगा रखे हैं वो यहां पार्टी की कब्र खोद रहे हैं। एक सह प्रभारी पांच दिन से रामपुर में रहकर कांग्रेस विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। नेतृत्व को गुमराह कर चुनाव न लड़ने का निर्णय सौदेबाजी और सरेंडर है। इससे कार्यकर्ता का मनोबल टूटा है।
कांग्रेस में सक्रिय सपा के एजेंट तोड़ना चाह रहे हमारा रिश्ता
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने भावुक होकर कहा कि अभी वह और उनकी मां बेगम नूरबानो कांग्रेस में हैं, लेकिन नूर महल और नेहरू-गांधी परिवार का रिश्ता टूटा तो इसके लिए कांग्रेस में सक्रिय सपा के एजेंट जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि रामपुर के शाही खानदान का नेहरू-गांधी परिवार से बहुत पुराना रिश्ता है।







