मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरने के दो साल बाद कमलनाथ के नेतृत्व पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं और देखा जा रहा है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का साथ जुटा नहीं पा रहे हैं। इन परिस्थितियों में विधानसभा चुनाव आते-आते कमलनाथ की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश में मई 2018 में कांग्रेस ने अरुण यादव को हटाकर प्रदेश कांग्रेस की कमान कमलनाथ को सौंपी थी जिसमें उनके राष्ट्रीय राजनीति के अनुभव का लाभ मिला था। शिवराज सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में ज्योतिरादित्य सिंधिया तो असंतुष्ट नेताओं को मनाने में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का साथ मिला था। अरुण यादव और अजय सिंह की जोड़ी ने भी इसमें उनका साथ दिया था। इसके बाद कांग्रेस की सरकार बनी तो सिंधिया को कमजोर करने के लिए कमलनाथ-दिग्विजय सिंह की जोड़ी ने संयुक्त रूप से काम किया और दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में दस साल सरकार चलाने के अनुभव को तब मंत्रालय में अनौपचारिक बैठकें लेकर सरकार में खासी दखलदांजी की। इस बीच सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़ा तो सरकार गिर गई और तब से दिग्विजय सिंह-कमलनाथ की दूरियां शुरू हुईं। हाल ही में दिग्विजय सिंह ने धरने के दौरान कमलनाथ पर तंज भी कस दिया था कि शिवराज सिंह चौहान से समय लेने के लिए क्या आपसे पूछना पड़ेगा। यह सार्वजनिक स्थान पर टिप्पणी काफी वायरल हुई थी।
अरुण-अजय सिंह की दिल्ली में मुलाकातें
कमलनाथ से दिग्विजय सिंह के रिश्तों के सार्वजनिक होने के बाद दूसरी लाइन के नेता पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की दिल्ली यात्राओं ने नाथ के लिए चिंता की स्थितियां बढ़ा दीं। हाईकमान से मुलाकात के बाद अरुण यादव ने प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ाई है तो अजय सिंह ने कमलनाथ पर तंज कसा कि वे हमें भी जिम्मेदारी दें जिससे काम कर सकें। इस तरह सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान के वीडियो भी जमकर वायरल हुए हैं।
राज्यसभा की रिक्त हो रही सीट भी कमलनाथ के लिए चुनौती
राज्यसभा की जून में रिक्त हो रही एक सीट भी कमलनाथ के लिए चुनौती हो सकती है क्योंकि इस एक सीट पर तन्खा सहित अरुण यादव और अजय सिंह भी दावेदार बनते जा रहे हैं। एक सीट से तीन लोगों को संतुष्ट करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। तन्खा की दावेदारी तो जी 23 के अहम सदस्य होने की वजह से खटाई में पड़ सकती है लेकिन उनका नाम काटा भी जाता है तो अरुण या अजय सिंह में से एक टिकट मिलने पर किसी एक की नाराजगी पार्टी को भुगतना होगी। यह नाराजगी विधानसभा चुनाव 2023 में पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है। ऐसे कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष में से किसी एक पद का त्याग करने पड़ सकता है।







