रविवार को मौका था सहारनपुर की राजनीतिक धुरी रहे चौधरी यशपाल सिंह की स्वर्ण जयंती समारोह का। स्थान था उनकी जन्मभूमि तीतरों। एक मंझे हुए राजनेता की तरह अखिलेश यादव ने जयंती समारोह के मंच से बड़े सधे अंदाज में विधानसभा -2022 के चुनाव का आगाज कर दिया। अपने भाषण में माता शाकुंभरी देवी से लेकर गुरूनानक तक का जक्रि किया। तो सम्राट मिहिर भोज का नाम लेकर गुर्जर समाज को एकजुट करने का प्रयास किया। वहीं, किसान, मजदूर और दलित वर्ग को भी साधने का प्रयास किया।
सहारनपुर को यूपी का प्रवेश द्वार माना जाता है। विधानसभा सीटों की गिनती भी सहारनपुर से ही शुरू होती है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों के एजेंडे में सहारनपुर का विशेष महत्व होता है। सभी दल सहारनपुर से चुनावी प्रचार का आगाज करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहारनपुर में चुनावी आगाज करते हुए कई तरह से अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। उन्होंने मंच से मतदाताओं को अपने पक्ष में जोड़ने के लिए सोशल इंजीनियरिंग की चाल चली। अखिलेश यादव ने अपने भाषण की शुरूआत की तो शुरू में ही माता शाकुंभरी देवी को नमन किया और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने श्रीमदभागवत गीता और गुरूनानक के ग्रंथ का जिक्र किया और हर वर्ग को साधने का प्रयास किया। इसके साथ ही महान सम्राट मिहिर भोज के नाम को लेकर हो रहे विवाद को भी उठाया और गर्जुर समाज को एकजुट करने का प्रयास भी करते दिखे।
स्वागत में भी दिखा इसका असर
भाषण से पहले मंच पर अखिलेश यादव का स्वागत सम्मान किया गया। इसमें भी अलग-अलग वर्ग को विशेष महत्व दिया गया। क्षत्रिय समाज के शेरसिंह राणा ने तलवार भेंट कर उनका स्वागत किया तो ब्राह्मण समाज के युवाओं ने भगवान परशुराम की प्रतिमा और फरसा भेंट किया। वहीं दलित समाज की ओर से बाबा साहब की प्रतिमा भेंट की गई।
किसान मजदूर और युवाओं की नब्ज टटोली
विधानसभा चुनाव का आगाज करते हुए अखिलेश यादव किसान, मजदूरों और युवाओं की नब्ज टटोलते नजर आए। कृषि कानूनों, लखीमपुर हिंसा गन्ना भुगतान को लेकर किसानों को साधा। नहीं बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे से मजदूरों और युवाओं की नब्ज भी टटोली। साथ ही किसानों के लिए अलग से फंड और युवाओं के लिए रोजगार की योजनाओं का दावा कर अपने पक्ष में करने का प्रयास किया गया।





